अब तानाशाह की अमेरिका पर हर पल रहेगी नजर! अंतरिक्ष में ऐसा काम करने जा रहा है उत्तर कोरिया, कांप उठेंगे दुश्मन देश

नई दिल्ली: उत्तर कोरिया और अमेरिका कट्टर दुश्मन हैं। दोनों की एक दूसरे से बनती नहीं है। अब तानाशाह किम जोंग उन ने एक बार फिर अमेरिका की धड़कनें बढ़ा दी हैं। जी हां, उत्तर कोरिया फिर से अपना जासूसी उपग्रह भेजने जा रहा है। उसने जापान को इस बारे में जानकारी दी है। उत्तर कोरिया ने जापान को बताया है कि वह अगले हफ्ते की शुरुआत में उपग्रह लॉन्च करने की योजना बना रहा है। यह उत्तर कोरिया का दूसरा जासूसी उपग्रह होगा। इसे 3 जून तक अंतरिक्ष की कक्षा में भेजा जाएगा। दक्षिण कोरिया, जापान और चीन के नेता सोमवार को अपनी पहली त्रिपक्षीय बैठक के लिए सियोल में एकत्र हुए थे, तभी तानाशाह के इस कदम की जानकारी सामने आई।

जापान के तटरक्षक बल ने कहा, ‘उसे उत्तर कोरिया द्वारा उपग्रह रॉकेट के प्रक्षेपण के बारे में सूचित किया गया है। उसने उपग्रह प्रक्षेपण को लेकर सुरक्षा चेतावनी जारी की है। उपग्रह प्रक्षेपण की प्रक्रिया सोमवार को कोरियाई प्रायद्वीप और चीन के बीच के जलक्षेत्र और फिलीपीन द्वीप लूजोन के पूर्व में शुरू होगी और 3 जून की मध्यरात्रि तक जारी रहेगी। अब सवाल यह उठता है कि उत्तर कोरिया ने अपने उपग्रह प्रक्षेपण के बारे में जापान को क्यों सूचित किया है? दरअसल, उत्तर कोरिया ने जापान को प्रक्षेपण के बारे में इसलिए सूचित किया है क्योंकि जापान का तटरक्षक बल पूर्वी एशिया में समुद्री सुरक्षा सूचनाओं का समन्वय और वितरण करता है।

जापान के मन में क्या है?
हालांकि, जापान चाहता है कि उत्तर कोरिया इसे लॉन्च न करे। जापानी तटरक्षक बल ने आगे कहा, ‘जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने अधिकारियों से कहा है कि वे उत्तर कोरिया से अमेरिका, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों के सहयोग से उपग्रह लॉन्च न करने का दृढ़ता से अनुरोध करें। इतना ही नहीं, उपाय करने और किसी भी आपातकालीन स्थितियों के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए।’ वहीं, दक्षिण कोरियाई सेना ने शुक्रवार को कहा कि उसे संकेत मिले हैं कि उत्तर कोरिया ऐसी गतिविधियों में शामिल है, जिसके बारे में माना जा रहा है कि वह उत्तर-पश्चिम में अपनी मुख्य तोंगचांगरी लॉन्च सुविधा से जासूसी उपग्रह लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है।

उत्तर कोरिया का दूसरा जासूसी उपग्रह
उत्तर कोरिया अपना दूसरा जासूसी उपग्रह लॉन्च करने जा रहा है। इससे पहले नवंबर 2023 में उत्तर कोरिया ने अंतरिक्ष में अपना पहला जासूसी उपग्रह तैनात किया था। इससे पहले दो बार उसे असफलता मिली थी। लेकिन तीसरे प्रयास में उसने अंतरिक्ष पर विजय प्राप्त कर ली। उत्तर कोरिया अंतरिक्ष से अपने दुश्मनों पर नज़र रखने के लिए लगातार जासूसी उपग्रह तैनात कर रहा है।

इस उपग्रह प्रक्षेपण का उद्देश्य क्या है?
उत्तर कोरिया ने अमेरिका के नेतृत्व वाले सैन्य खतरों से निपटने और अंतरिक्ष आधारित निगरानी नेटवर्क बनाने के अपने प्रयासों के तहत अपना पहला जासूसी उपग्रह अंतरिक्ष की कक्षा में भेजा। उत्तर कोरिया जासूसी उपग्रह के जरिए अमेरिका और दक्षिण कोरिया की हर गतिविधि पर नजर रखना चाहता है। उसका कहना है कि उसने अमेरिका और दक्षिण कोरिया की गतिविधियों पर बेहतर नजर रखने के लिए यह कदम उठाया है। इतना ही नहीं, अपनी परमाणु-सक्षम मिसाइलों की सटीक-हमला करने की क्षमता बढ़ाने के लिए जासूसी उपग्रहों की जरूरत है। पिछले साल ही उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने गवर्निंग पार्टी की बैठक में घोषणा की थी कि उत्तर कोरिया 2024 में तीन और सैन्य जासूसी उपग्रह लॉन्च करेगा।

संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंध लगा दिया है
संयुक्त राष्ट्र ने उत्तर कोरिया पर सैटेलाइट लॉन्च करने पर प्रतिबंध लगा रखा है। जबकि उत्तर कोरिया लगातार कहता रहा है कि उसे सैटेलाइट लॉन्च करने और मिसाइल परीक्षण करने का अधिकार है। पिछले साल नवंबर में जब उत्तर कोरिया ने सैटेलाइट लॉन्च किया था, तब कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव गहरा गया था। पिछले कुछ सालों में उत्तर कोरिया अपने हथियारों के जखीरे को आधुनिक बनाने और बढ़ाने के लिए खतरनाक मिसाइल परीक्षणों में लगा हुआ है। यही वजह है कि अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान तनाव में आ गए हैं। ये तीनों देश अपनी सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने के लिए लगातार मंथन कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया का मानना ​​है कि अपने हथियारों के जखीरे को बढ़ाने से अमेरिका के साथ भविष्य की कूटनीति में उसकी ताकत बढ़ेगी।

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