एक्सप्लेनर: कांग्रेस से लेकर बीजेपी तक के चुनावों में कैसे हावी रहा भाई-भतीजावाद, किस परिवार से कौन जीता

हाइलाइट

लोकसभा चुनाव में 80 राजनीतिक परिवारों के 43 उम्मीदवार जीते कांग्रेस से सबसे ज्यादा 18 और भाजपा से 12 उम्मीदवार जीते महाराष्ट्र में सबसे अधिक परिवार के सदस्यों ने चुनाव लड़ा

इस चुनाव में एक बड़ा मुद्दा भाई-भतीजावाद का रहा, जो नेताओं के भाषणों में प्रमुखता से छाया रहा। भाई-भतीजावाद का विरोध करने वाली पार्टियों ने राजनीतिक परिवारों से उम्मीदवार उतारे और अन्य पार्टियों ने भी ऐसा ही किया। इस चुनाव में करीब 80 ऐसे राजनीतिक परिवार शामिल हुए। इनमें से 43 चुनाव जीते। इनमें से 18 कांग्रेस से और 12 भाजपा से जीते।

राष्ट्रीय अंग्रेजी अखबार हिंदू ने इस पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट में राजनीतिक परिवार वे हैं जिनके सदस्य पहले सांसद या विधायक रह चुके हैं। लगभग सभी राजनीतिक दलों ने ऐसे राजनीतिक परिवारों के भाई-बहन, माता-पिता, चाचा-चाची, दादा-दादी, पति या पत्नी को इन चुनावों में टिकट दिया है। ये सभी राजनीतिक परिवार ऐसे हैं जिनके सदस्य विधानसभा या विधान परिषद, लोकसभा, राज्यसभा का हिस्सा रहे हैं या हैं या मंत्री पद पर रह चुके हैं।

इसमें शामिल प्रमुख दलों में 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग के उम्मीदवार शामिल हैं और टिकट देने वाली पार्टियों में भाजपा, कांग्रेस, आप, एआईटीसी, बीजद, द्रमुक, जद(एस), जद(यू), लोजपा(आरवी), राकांपा(सपा), राजद, शिवसेना, शिवसेना (यूबीटी), टीडीपी, वाईएसआरसीपी शामिल हैं।

कांग्रेस और भाजपा से चुनाव लड़े राजनीतिक परिवार
कांग्रेस ने 35 राजनीतिक परिवारों के लोगों को टिकट दिए, जिनमें से 18 जीते और 17 हारे। भाजपा ने 23 ऐसे परिवारों के लोगों को टिकट दिए, जिनमें से 12 जीते और 11 हारे। बीजद ने 4 ऐसे लोगों को टिकट दिए और सभी हार गए। लोक जनशक्ति पार्टी ने 3 राजनीतिक परिवारों को टिकट दिए और तीनों ही जीत गए। यही तेलुगु देशम के साथ भी हुआ यानी 3 राजनीतिक परिवार और तीनों ही जीत गए। शिवसेना ने दो परिवारों के लोगों को टिकट दिया और दोनों ही जीत गए।

इस बार कांग्रेस ने 35 राजनीतिक परिवारों के 35 लोगों को चुनाव टिकट दिया, जिनमें से 18 लोग जीत गए।

लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने अपने परिवार के 5 सदस्यों को मैदान में उतारा था। उन्होंने खुद और अपनी पत्नी डिंपल यादव के साथ 3 चचेरे भाइयों को भी चुनाव लड़ाया था। यादव परिवार के सभी 5 चेहरे चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। अब यादव परिवार के सभी 5 नेता एक साथ लोकसभा संसद में नजर आएंगे।

सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव कन्नौज लोकसभा सीट से चुनाव लड़े। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार सुब्रत पाठक को 1,70000 मतों से हराया। उनकी पत्नी डिंपल यादव ने मैनपुरी में योगी सरकार के मंत्री जयवीर सिंह को करीब 2,21000 वोटों से हराया। धर्मेंद्र यादव ने आजमगढ़ से भाजपा उम्मीदवार भोजपुरी अभिनेता दिनेश लाल उर्फ ​​निरहुआ को डेढ़ लाख से अधिक मतों से हराया। अखिलेश यादव के चाचा रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव फिरोजाबाद से चुनाव जीत गए। चाचा शिवपाल सिंह यादव के बेटे आदित्य यादव बदायूं से जीते।

लालू यादव की बेटी और पासवान का बेटा
उल्लेखनीय उम्मीदवारों में राजद संस्थापक और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य शामिल हैं, जो सारण सीट से हार गईं। लेकिन उनकी दूसरी बेटी मीसा भारती पाटलिपुत्र से चुनाव जीतीं। उन्होंने भाजपा के रामकृपाल यादव को हराया।

लोजपा (रालोद) पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान हाजीपुर (सु) सीट से जीते। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज नई दिल्ली सीट से जीतीं। भाजपा सांसद बृज भूषण सिंह के बेटे करण भूषण सिंह कैसरगंज से जीते।

तीन बार के भाजपा विधायक एलए रवि सुब्रमण्यम के भतीजे तेजस्वी सूर्या बेंगलुरु दक्षिण सीट से जीते। निषाद पार्टी के संस्थापक संजय निषाद के बेटे प्रवीण कुमार निषाद संत कबीर नगर सीट से हार गए।

ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, टीएमसी सम्मान, भगवा रंग, स्वामी विवेकानंद, भगवा रंग, ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, स्वामी विवेकानंद, लोकसभा चुनाव 2024

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी चुनाव जीत गए। (फाइल फोटो)

शिंदे के बेटे और ममता बनर्जी के भतीजे
महाराष्ट्र के मौजूदा मुख्यमंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के बेटे डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे कल्याण सीट से जीते। पश्चिम बंगाल की मौजूदा मुख्यमंत्री और एआईटीसी नेता ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी डायमंड हार्बर सीट से जीते। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता एके एंटनी के बेटे अनिल के. एंटनी पठानमथिट्टा सीट से चुनाव हार गए। उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था।

रेवन्ना, देवेगौड़ा के पोते
हासन निर्वाचन क्षेत्र से जेडी(एस) उम्मीदवार प्रज्वल रेवन्ना चुनाव हार गए। पूर्व प्रधानमंत्री और जेडी(एस) नेता एचडी देवेगौड़ा के पोते कई महिलाओं द्वारा यौन उत्पीड़न का आरोप लगाए जाने के बाद सुर्खियों में आए। इन आरोपों के लिए वह वर्तमान में विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच का सामना कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के साथ देवेगौड़ा परिवार (पीटीआई)

हालांकि, देवेगौड़ा परिवार में उनके बेटे और जेडीएस प्रमुख कुमारस्वामी चुनाव जीत गए हैं। उनके दामाद मंजूनाथ बेंगलुरु ग्रामीण सीट से जीते हैं।

किस राज्य में ऐसे उम्मीदवारों की संख्या सबसे अधिक है
सबसे ज़्यादा उम्मीदवार महाराष्ट्र से मैदान में थे. इस राज्य में 13 राजनीतिक परिवारों के उम्मीदवार मैदान में थे. 08 जीते और 05 हारे. इस मामले में दूसरे नंबर पर कर्नाटक रहा, जहां 11 राजनीतिक परिवारों के 06 उम्मीदवार जीते और 05 हारे. बिहार में 09 परिवारों के उम्मीदवार चुनाव लड़े और 05 जीते जबकि 04 हारे. ओडिशा में 06 परिवारों के 02 उम्मीदवार जीते और 04 हारे. आंध्र में राजनीतिक परिवारों के 05 उम्मीदवारों में से 4 जीते और 1 हारे. उत्तर प्रदेश में 05 राजनीतिक परिवारों ने चुनाव में हिस्सा लिया और 03 जीते और 02 हारे.

पूरे भारत में राजनीतिक वंशवादी परिवार हैं। बेशक, इसमें सभी पार्टियां शामिल हैं।

नेहरू-गांधी परिवार
नेहरू-गांधी परिवार का कांग्रेस पार्टी से जुड़ाव 1920 के दशक में मोतीलाल नेहरू से शुरू हुआ, जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था। उनके बेटे जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में यह परिवार और भी प्रभावशाली हो गया। वे देश के पहले प्रधानमंत्री बने, जिसके बाद परिवार की बेटी इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं। फिर राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने। इस बार इस परिवार के राहुल गांधी रायबरेली और वायनाड दोनों सीटों से जीते।

वर्तमान में देश का सबसे बड़ा राजनीतिक परिवार कौन है?
देश के इस सबसे बड़े राजनीतिक घराने से कुल 13 लोग मैदान में हैं। इनमें मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, डिंपल यादव, शिवपाल यादव, राम गोपाल यादव, अंशुल यादव, प्रेमलता यादव, अरविंद यादव, तेज प्रताप सिंह यादव, सरला यादव, अंकुर यादव, धर्मेंद्र यादव और अक्षय यादव शामिल हैं। इनमें से पांच लोगों ने इन चुनावों में हिस्सा लिया।

टैग: 2024 लोकसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव 2024