एनडीए में ये हो चुका है, इंडी गठबंधन में सीट शेयरिंग किस फॉर्मूले पर होगी, समझिए पूरा गणित- लोकसभा चुनाव इंडी अलायंस, राजद, कांग्रेस और लेफ्ट के बीच सीट शेयरिंग का फॉर्मूला जल्द सुलझ जाएगा, बोले तेजस्वी यादव- News18 हिंदी

पटना. लोकसभा चुनाव को लेकर एनडीए गठबंधन में सीट शेयरिंग का मसला सुलझ गया. लेकिन, INDI गठबंधन में क्या होगा? बिहार के सियासी गलियारे में ये सवाल हर किसी की जुबान पर आ रहा है. दरअसल, बिहार में विपक्षी दल के नेता तेजस्वी यादव ने मुंबई से पटना लौटते वक्त दावा किया कि सीट बंटवारे का मसला आसानी से सुलझ जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, इस हफ्ते INDI गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर घोषणा कर दी जाएगी.

आपको बता दें कि सीट बंटवारे के मामले में राजद सबसे आगे चल रही है, इसलिए सीटों का बंटवारा काफी हद तक लालू यादव और तेजस्वी यादव के बीच होने वाला है. इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता. वहीं, पिछले लोकसभा चुनाव में एक सीट जीतने के बावजूद कांग्रेस के अंदर असमंजस और संशय की स्थिति है, क्योंकि कांग्रेस जानती है कि सीटों के मामले में राजद उससे काफी आगे है.

कांग्रेस इतनी सीटों के लिए तैयार हो सकती है

हालांकि, कांग्रेस के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह का मानना ​​है कि पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 10 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, ऐसे में उन्हें कम से कम 10 या उससे अधिक सीटें मिलनी चाहिए. हालांकि, हालात बिगड़ने के डर से कांग्रेस नेता यह कहने से नहीं हिचकिचाते कि सीट बंटवारे के मामले में कांग्रेस लचीली है. अगर एक सीट इधर से उधर हो जाए यानी पिछले लोकसभा चुनाव में 10 सीटों पर लड़ने वाली कांग्रेस को 9 सीटें भी मिल जाएं तो वह इसके लिए तैयार हो जाएगी. क्योंकि सवाल महागठबंधन का है.

वाम दलों की अपनी मांगें हैं

वहीं, सीट बंटवारे को लेकर वाम दलों ने भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ा दी है. सीपीआई (एमएल) ने 8 सीटों पर चुनाव लड़ने का संकेत दिया है जबकि अन्य वामपंथी दल भी तीन सीटें चाहते हैं. हालांकि, अंतिम फैसला मल्लिकार्जुन खड़गे और लालू प्रसाद यादव को लेना है. लेकिन, सीट बंटवारा जल्द से जल्द हो जाना चाहिए. महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस भी यही चाहती है. सबसे बड़ा सवाल पशुपति पारस और मुकेश सहनी को लेकर है. अगर पशुपति कुमार पारस राष्ट्रीय जनता दल से हाथ मिलाते हैं तो न सिर्फ एलजेपी का पारस गुट अपनी प्रतिष्ठा खो देगा बल्कि महागठबंधन भी खुद को मजबूत और आरामदायक स्थिति में मान सकेगा. हालांकि, इस बारे में अभी साफ तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है.

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