खुल गया डायनासोर के विलुप्त होने का राज! क्या प्रलय धूल के बादल से आया था? वैज्ञानिकों ने बताया कैसे हुई तबाही?

नई दिल्ली। धरती पर डायनासोर की मौजूदगी के कई सबूत मिल चुके हैं, लेकिन वे कैसे विलुप्त हुए इसका सही जवाब किसी के पास नहीं है। लंबे समय से शोधकर्ता यह सुझाव देते रहे हैं कि डायनासोर की मृत्यु किसी क्षुद्रग्रह के पृथ्वी से टकराने के कारण हुई होगी। अब डायनासोर के विलुप्त होने को लेकर एक नई स्टडी सामने आई है। इस अध्ययन में बताया गया है कि 66 मिलियन यानी करीब 65 करोड़ साल पहले चट्टानों के टूटने ने उनके विलुप्त होने में अहम भूमिका निभाई थी.

बेल्जियम की रॉयल ऑब्जर्वेटरी के वैज्ञानिकों की एक टीम का एक नया अध्ययन सोमवार को प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन में कहा गया था कि माउंट एवरेस्ट से 11 गुना ऊंची एक विशाल चट्टान के टूटने और उसके मलबे और धूल से पृथ्वी के वायुमंडल में भयंकर अंधेरा पैदा हो गया था. यह धूल और मलबा पृथ्वी के वायुमंडल में 15 वर्षों तक बना रहा। चट्टान का मलबा लगभग 2,000 गीगाटन का था, जिसके कारण सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक नहीं पहुंच सकी और एक दीवार बन गई।

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यह दीवार 15 वर्षों तक वातावरण में बनी रही
वैज्ञानिकों का दावा है कि यह दीवार 15 साल तक वायुमंडल में मौजूद रही। सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक न पहुँच पाने के कारण लम्बी शीत ऋतु आयी, जिससे अनेक पेड़-पौधे नष्ट हो गये। इसके प्रभाव से पृथ्वी पर मौजूद लगभग 75 प्रतिशत जानवर 15 साल के अंदर मर गये। बेल्जियम के वैज्ञानिकों ने पाया कि आसमान में फैले धूल के कुछ कण अमेरिका के नॉर्थ डकोटा में टैनिस जीवाश्म स्थल पर पाए गए। जब इन कणों ने वायुमंडल में एक दीवार बनाई तो डायनासोर धरती से विलुप्त हो गए। शोधकर्ताओं ने बताया कि धूल के कण 0.8 से 8.0 माइक्रोमीटर के थे.

क्षुद्रग्रह सिद्धांत पर संदेह
हालाँकि, एक अन्य अध्ययन में, जियोलॉजिकल फॉर्मेशन इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि एक विशाल क्षुद्रग्रह की टक्कर के कारण पृथ्वी से डायनासोर के विलुप्त होने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं। पहले कहा गया था कि एक बड़े क्षुद्रग्रह की टक्कर के कारण जंगल की आग से सल्फर और कालिख वायुमंडल में फैल गई, जिसके कारण पृथ्वी एक लंबी अंधेरी सर्दी में डूब गई। इसके प्रभाव से डायनासोर विलुप्त हो गये।

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