चिराग पासवान को मिल सकता है इन दो मंत्रालयों में से कोई एक…उनके पिता भी संभाल चुके हैं जिम्मेदारी

नई दिल्ली। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर एनडीए नेताओं में मंथन शुरू हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो एनडीए में शामिल टीडीपी, जेडीयू और एलजेपी जैसी पार्टियों ने बीजेपी से सौदेबाजी शुरू कर दी है। वहीं, दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि पीएम मोदी अपने सहयोगियों को कौन-कौन से मंत्रालय देंगे। आइए जानते हैं कि सहयोगी दलों की नजर किन मंत्रालयों पर है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो एनडीए में शामिल टीडीपी, जेडीयू, शिवसेना शिंदे गुट और एलजेपी जैसी पार्टियों ने अलग-अलग मंत्रालयों की मांग शुरू कर दी है। आपको बता दें कि इन सभी मंत्रालयों पर पीएम मोदी की सीधी नजर रहती है। हाल के सालों में इन मंत्रालयों ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। ये मंत्रालय हैं सड़क परिवहन और राजमार्ग, रेलवे, शहरी आवास और स्वास्थ्य मंत्रालय। लेकिन, अब इन मंत्रालयों पर सहयोगी दलों की नजर है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने दो कैबिनेट और एक राज्य मंत्री की मांग की है, टीडीपी ने तीन कैबिनेट मंत्री, एक राज्य मंत्री के साथ-साथ लोकसभा अध्यक्ष का पद मांगा है। वहीं, बिहार में पांच सीटें जीतने वाली एलजेपी (रामविलास पासवान) ने एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री की मांग की है। बिहार से एनडीए की एक और सहयोगी पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी एचएएम ने भी एक कैबिनेट मंत्री की मांग की है।

बात करें चिराग पासवान की तो उन्हें एक मंत्रालय मिल सकता है। चिराग को उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय या रासायनिक उर्वरक मंत्रालय दिया जा सकता है। आपको बता दें कि मोदी सरकार के पहले और दूसरे कार्यकाल के शुरुआती दिनों में चिराग पासवान के पिता रामविलास पासवान उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय संभाल रहे थे।

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हालांकि, एलजेपी सूत्रों के मुताबिक चिराग पासवान खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के बजाय दूसरे मंत्रालयों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। कहा जा रहा है कि चिराग पासवान को रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय भी मिल सकता है। क्योंकि, रामविलास पासवान भी इस मंत्रालय को संभाल चुके हैं। हालांकि, रामविलास पासवान दूरसंचार के साथ-साथ रेल मंत्री भी रह चुके हैं। लेकिन, इस बार चिराग पासवान को ये दोनों मंत्रालय नहीं मिल सकते हैं।

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