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शी जिनपिंग वियतनाम राजकीय यात्रा: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग वियतनाम की दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर गए हैं। वहां पहुंचकर उन्होंने चीन और वियतनाम के साझा हितों को साधने पर जोर दिया. इससे पहले सितंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी वियतनाम का दौरा किया था. शी जिनपिंग छह साल बाद वियतनाम का दौरा कर रहे हैं. जिनपिंग का यह दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी वियतनाम का दौरा किया था. चीन हमेशा से इस क्षेत्र में अमेरिकी प्रभुत्व के ख़िलाफ़ रहा है.

जिनपिंग ने क्या कहा?

चीनी राष्ट्रपति ने वियतनाम में एक संबोधन में कहा कि चीन और वियतनाम के बीच सांस्कृतिक रिश्ते ने एक-दूसरे को जोड़े रखा है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जिनपिंग के दौरे को द्विपक्षीय साझेदारी का हिस्सा बताया है.

बांस कूटनीति क्या है?

वियतनाम ने हमेशा सभी देशों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखे हैं। कूटनीति की भाषा में इसे ‘बैम्बू डिप्लोमेसी’ कहा जाता है। बैम्बू डिप्लोमेसी एक प्रकार की कूटनीतिक नीति है जिसमें दो महाशक्तियों के साथ संबंधों को संतुलन के साथ बनाए रखा जाता है। चीन और वियतनाम एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत बंधे हैं। हाल ही में अमेरिका ने वियतनाम के साथ भी ऐसा समझौता किया था. चीन वियतनाम का सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार भी है।

जब वियतनाम ने बाइडेन से की चीन की शिकायत

इस साल सितंबर में जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने वियतनाम का दौरा किया था, तब वियतनाम ने दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते दखल की ओर अमेरिका का ध्यान आकर्षित किया था.

शी जिनपिंग का दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि फिलीपींस ने दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभुत्व के खिलाफ आवाज उठाई है. फिलीपींस ने आरोप लगाया था कि चीन ने उसके जहाजों पर पानी का छिड़काव किया था. इस मामले को लेकर फिलीपींस ने भी चीनी राजदूत को तलब किया था और अपनी नाराजगी जताई थी.

चीन इस मामले पर वियतनाम को अपने खेमे में शामिल करना चाहता है क्योंकि वियतनाम भी दक्षिण चीन सागर के कई द्वीपों पर अपना दावा करता रहा है.

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