नरेंद्र मोदी के लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने से दुनिया में भारत का प्रभाव और बढ़ेगा, विदेश नीति नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगी

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नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री।

नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी के लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने से दुनिया में भारत का दबदबा और बढ़ेगा। इसके साथ ही विदेश नीति भी नए स्तर पर पहुंचेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले 10 साल के कार्यकाल में भारत ने दुनिया के मन में अपनी नई छवि अंकित की है। अपने पिछले दो कार्यकालों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण एजेंसियों के अनुसार दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता रहे हैं। अब दुनिया में उन्हें एक विश्व नेता के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में उनके रिकॉर्ड तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने से दुनिया में भारत का दबदबा और बढ़ेगा।

पीएम मोदी 1962 में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बाद लगातार तीसरी बार शपथ लेने वाले दूसरे नेता बन गए हैं। पीएम मोदी के पिछले कार्यकाल में फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे ताकतवर देश भारत के रणनीतिक साझेदार बने। इससे पाकिस्तान और चीन जैसे दुश्मनों को झटका तो लगा ही, साथ ही ताकतवर देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी ने उसे दुनिया में एक नए उभरते नेता के तौर पर पेश किया।

भारत की विदेश नीति ने अपनी क्षमता सिद्ध की

मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी विदेश नीति का लोहा पूरी दुनिया के सामने मनवाया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए तो भारत ने अपने परंपरागत और करीबी दोस्त से कच्चा तेल खरीदना जारी रखा। अमेरिका और पश्चिमी देशों की आपत्ति पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ऐसा जवाब दिया कि वे देश अवाक रह गए। वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति के सामने यह कहने का साहस दिखाया कि “यह युद्ध का दौर नहीं है”। पीएम मोदी ने रूस और यूक्रेन को बातचीत के जरिए विवादों का हल निकालने के लिए प्रेरित किया। वहीं दूसरी ओर उन्होंने यूक्रेन के युद्ध पीड़ितों को मानवीय सहायता भेजकर राष्ट्रपति जेलेंस्की का दिल भी जीत लिया।

इजराइल-हमास युद्ध के दौरान भारत पीएम नेतन्याहू के पक्ष में बोलने वाला पहला देश बना था। पीएम मोदी ने सबसे पहले इजराइल पर हमास के हमले की निंदा की थी, इसे आतंकी हमला बताया था और बेंजामिन नेतन्याहू के साथ खड़े होने की प्रतिबद्धता जताई थी। इससे दुनिया के सभी रणनीतिकार हैरान रह गए थे। इस दौरान भारत ने फिलिस्तीन के साथ अपने पुराने रिश्ते भी कायम रखे।

अमेरिकी विरोध के बावजूद चाबहार समझौते पर हस्ताक्षर किये गये

भारत ने हाल ही में अमेरिकी प्रतिबंधों और विरोध के बावजूद ईरान के साथ सबसे बड़ा और ऐतिहासिक चाबहार बंदरगाह सौदा किया। इसके साथ ही भारत को यूरोप और पश्चिम तक पहुंचने का एक नया रास्ता मिल गया। मोदी के दोनों कार्यकालों में भारत ने खुद को एक ऐसे देश के रूप में स्थापित किया जो किसी भी देश के सामने नहीं झुकेगा। पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक करके और गलवान में चीन को करारा जवाब देकर भारत ने दुनिया के सामने एक शक्तिशाली और 21वीं सदी के भारत की मजबूत छवि पेश की।

भारत अपने तीसरे कार्यकाल में विश्व नेता के रूप में उभरेगा

दुनिया इस दौरान कई वैश्विक संकटों से जूझ रही है। इनमें युद्ध से लेकर महामारी, खाद्य और ऊर्जा संकट, ग्लोबल वार्मिंग जैसी बड़ी समस्याएं शामिल हैं। ऐसे में पूरी दुनिया इन वैश्विक संकटों के समाधान के लिए भारत की ओर देख रही है। भारत ने अब तक अपनी छवि एक वैश्विक समाधान प्रदाता, निराशा में आशा जगाने वाले देश के रूप में बनाई है। इसके साथ ही महामारी और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे दुनिया के देशों के लिए भारत सबसे बड़ा मददगार साबित हुआ है। ऐसे में नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर दुनिया की भारत से उम्मीदें और बढ़ जाएंगी।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में दावा मजबूत होगा

भारत में स्थिर सरकार होने से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी मजबूत होगी। तीसरी बार पीएम बनने के बाद पीएम मोदी यूएनएससी में भारत की आवाज को और मुखर कर पाएंगे। पिछले दो कार्यकालों के दौरान भारत ने यूएनएससी में स्थायी सदस्यता के लिए अपनी दावेदारी को मजबूत किया है। इसने सुरक्षा परिषद पर सुधारों के लिए दबाव भी बनाया है ताकि भारत जैसे अन्य शक्तिशाली देशों को यूएनएससी की स्थायी सदस्यता मिल सके।

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