पीएम नरेंद्र मोदी के दौरे से नाराज चीन का कहना, अरुणाचल प्रदेश हमारा हिस्सा चीन ने अरुणाचल प्रदेश को बताया अपना हिस्सा, पीएम मोदी के दौरे के दौरान कही ये बात

पीएम मोदी ने किया अरुणाचल प्रदेश का दौरा: पीएम नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते अरुणाचल प्रदेश का दौरा किया था. ये बात पड़ोसी देश चीन को रास नहीं आ रही है. यही कारण है कि चीन ने सोमवार (11 मार्च 2024) को भारत के समक्ष राजनयिक विरोध दर्ज कराया है। चीन का कहना है कि भारत के इस कदम से सीमा विवाद और उलझ जाएगा. यह पहली बार नहीं है कि चीन ने भारत के इस हिस्से पर अपना दावा जताया है. इससे पहले भी वह लगातार अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करते रहे हैं.

प्रधानमंत्री ने सेला सुरंग राष्ट्र को समर्पित की

भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (9 मार्च 2024) को अरुणाचल प्रदेश में 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित सेला सुरंग राष्ट्र को समर्पित की। यह सुरंग रणनीतिक महत्व वाले तवांग को हर मौसम में सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों की आसान आवाजाही सुनिश्चित होने की भी उम्मीद है।

यह सुरंग असम के तेजपुर को अरुणाचल के पश्चिमी कामेंग जिले से जोड़ने वाली सड़क पर बनाई गई है. इतनी ऊंचाई पर स्थित यह दुनिया की सबसे लंबी डबल लेन सड़क सुरंग बताई जा रही है। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, सेला सुरंग के माध्यम से सैनिकों और हथियार प्रणालियों को चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के विभिन्न अग्रिम स्थानों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है।

चीन अरुणाचल को दक्षिण तिब्बत होने का दावा करता है। इस दावे पर जोर देने के लिए, उसने नियमित रूप से भारतीय नेताओं के राज्य के दौरे पर आपत्ति जताई है। बीजिंग ने इस क्षेत्र का नाम जांगनान रखा है। वहीं, भारत ने अरुणाचल पर चीन के दावे को बार-बार खारिज किया है और कहा है कि यह राज्य देश (भारत) का अभिन्न अंग है।

नई दिल्ली ने क्षेत्र का नाम बदलने के चीन के कदम को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि वह सच्चाई नहीं बदल सकता। सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन से मोदी के अरुणाचल दौरे के बारे में आधिकारिक मीडिया ने पूछा तो उन्होंने कहा, ‘जंगनान इलाका चीन का क्षेत्र है।’

उन्होंने कहा, ”चीन ने कभी भी अरुणाचल प्रदेश को भारत के अधीन नहीं माना है और इसका कड़ा विरोध किया है.” उन्होंने कहा कि चीन-भारत सीमा विवाद अभी तक सुलझा नहीं है. भारत को चीन के ज़ंगनान क्षेत्र को मनमाने ढंग से विकसित करने का कोई अधिकार नहीं है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “भारत के संबंधित कदम सीमा विवाद को और अधिक जटिल बना देंगे।” चीन प्रधानमंत्री की चीन-भारत सीमा के पूर्वी हिस्से की यात्रा का दृढ़ता से विरोध करता है। वांग ने कहा, ”हमने भारत के समक्ष राजनयिक विरोध दर्ज कराया है।”

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