यहां जानवरों से भी बदतर है लोगों की जिंदगी, पिंजरे में रहने को हैं मजबूर, हैरान कर देंगी ये तस्वीरें!

दुनिया भर में ऐसे कई देश हैं जहां लोग गरीबी और कठिनाइयों के बीच रहते हैं। इन देशों के हालात देखकर दुख होता है. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे देश के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल के कारण दुनिया भर में चर्चा में है, लेकिन इसके अलावा इसका एक और चेहरा भी है। वो चेहरा जो दुनिया के लोगों से छिपा है या यूं कहें कि अछूता है. हम बात कर रहे हैं हांगकांग की. आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन हम आपको बता दें कि आलीशान इमारतों वाला हांगकांग का एक हिस्सा ऐसा भी है, जहां लोग पिंजरों में कैद होकर जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन यकीन मानिए इन तस्वीरों को देखकर आपका दिल कांप उठेगा। ये तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं. हालाँकि, लोहे से बने ये पिंजरे भी इन गरीबों को आसानी से उपलब्ध नहीं होते हैं। इन पिंजरों में रहने की उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ती है। दिल्ली-मुंबई में आप सोसायटी से अलग 20,000 रुपये तक के कमरे आसानी से किराए पर ले सकते हैं। लेकिन यहां एक पिंजरे की कीमत लगभग 32 हजार रुपये प्रति माह है। इन पिंजरों को खंडहर या टूटे हुए घरों में रखा जाता है। इन तस्वीरों को बेनी लैम ने खींचा है। बोर्डपांडा से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैं उस दिन घर आकर बहुत रोया. उनकी फोटो सीरीज का नाम ट्रैप्ड था.

एक अपार्टमेंट में केवल 2 शौचालय हैं। (फोटो- सोशल मीडिया)

खंडहर इमारतों में 100-100 लोग एक साथ रहते हैं।

आपको बता दें कि आपने झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों के बारे में भी सुना होगा, जिन्हें किराए के नाम पर मुश्किल से कोई पैसा देना पड़ता है, लेकिन हांगकांग के ये जेल जैसे पिंजरे बहुत अच्छे किराए पर उपलब्ध हैं। इन पिंजरों में एक अपार्टमेंट के अंदर 100-100 लोग मजबूरी में रहते हैं। इतना ही नहीं, एक अपार्टमेंट में केवल 2 शौचालय हैं, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ जाती है। सोसाइटी फॉर कम्युनिटी ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, हांगकांग में इस समय एक लाख से ज्यादा लोग ऐसे घरों में रह रहे हैं। बेनी लैम अपने फेसबुक पेज पर लिखते हैं कि खाना पकाने से लेकर सोने तक सब कुछ 15 वर्ग फुट के पिंजरे में करना पड़ता है। यहां रहने वाले ज्यादातर लोग रेस्तरां या घरों में साफ-सफाई का काम करते हैं।

कॉफ़िन हाउस हांगकांग

लोग 15 वर्ग फीट के पिंजरों में बच्चों के साथ रहते हैं। (फोटो- सोशल मीडिया/बेनी लैम)

ताबूत अपार्टमेंट कहा जाता है
हांगकांग में इस प्रकार के अपार्टमेंट को कॉफ़िन अपार्टमेंट कहा जाता है। हालाँकि, ऐसे अपार्टमेंट न केवल हांगकांग में, बल्कि दक्षिण कोरिया, सियोल, लॉस एंजिल्स में भी हैं। समस्या सिर्फ यह नहीं है कि कमरे की बजाय पिंजरों में जिंदगी गुजारनी पड़ती है, बल्कि पिंजरों का साइज भी तय है। कुछ पिंजरे छोटे केबिन के आकार के होते हैं और कुछ ताबूत के आकार के होते हैं। ज्यादातर लोगों के पास गद्दे बिछाने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं होती, इसलिए ये लोग बांस की चटाई का इस्तेमाल करते हैं।

टैग: अजब भी ग़ज़ब भी, हांगकांग, खबरे हटके, हे भगवान