यूपी की ब्राह्मण बहुल सीट पर टीएमसी ने मारी बाजी, एसपी ने बनाई दूरी, क्या है पूरा मामला?

भदोही लोकसभा सीट पर एक बार फिर सियासी घमासान मचा हुआ है. यह वही सीट है जहां से चंबल के बीहड़ों पर राज करने वाली दस्यु सुंदरी फूलन देवी दो बार सांसद की कुर्सी पर रह चुकी हैं। 2009 से पहले इस सीट का नाम मिर्ज़ापुर-भदोही हुआ करता था. 2009 के परिसीमन में भदोही लोकसभा सीट अलग हो गई. इसका गठन भदोही की तीन विधानसभा सीटों और प्रयागराज जिले की दो विधानसभा सीटों को मिलाकर किया गया था। भदोही पूरी दुनिया में अपने खूबसूरत मखमली कालीनों के लिए जाना जाता है, लेकिन कालीनों के अलावा भदोही की चर्चा हर जगह 1996 में होने लगी जब मुलायम सिंह यादव दस्यु सुंदरी फूलन देवी को चुनाव मैदान में उतारा. इस चुनाव में फूलन देवी जीत गईं. इसके बाद 1998 में बीजेपी के वीरेंद्र सिंह मस्त ने फूलन देवी से यह सीट छीन ली थी. लेकिन, 1999 में फूलन देवी ने फिर पलटवार किया और वीरेंद्र सिंह मस्त को हराकर यह सीट सपा की झोली में डाल दी.

भदोही पर ममता बनर्जी की नजर
इस सीट पर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है. जहां एक तरफ बीजेपी और बसपा ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है समाजवादी पार्टी यह सीट टीएमसी को दे दी है. ममता बनर्जी की टीएमसी ने इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी के परपोते ललितेश पति त्रिपाठी को मैदान में उतारा है. इस सीट पर ब्राह्मण और बिंद मतदाता निर्णायक हैं, वहीं मुस्लिम और दलित मतदाताओं की भूमिका भी काफी अहम है.

भदोही की सियासी साजिश
2008 से पहले यह सीट मिर्ज़ापुर-भदोही लोकसभा क्षेत्र के नाम से जानी जाती थी. भदोही लोकसभा सीट का गठन 2009 में परिसीमन के बाद हुआ था भदोही जिला इनमें भदोही के अलावा ज्ञानपुर, औराई, प्रतापपुर और प्रयागराज की हंडिया विधानसभा सीटें शामिल थीं।

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1952 और 1957 में कांग्रेस के जॉन और विल्सन ने जीत हासिल की थी. 1962 में कांग्रेस से श्यामधर मिश्र, 1967 में जनसंघ से वंश नारायण सिंह, 1971 में कांग्रेस से अजीज इमाम, 1975 में जनता पार्टी से फकीर अली अंसारी, 1980 से 1989 तक कांग्रेस से अजीज इमाम, 1989 में कांग्रेस से जनता दल 1991 में यूसुफ बेग बीजेपी से, 1996 में बीजेपी से वीरेंद्र सिंह मस्त, 1998 में एसपी से फूलन देवी, 1999 में एसपी से फूलन देवी, 2002 में एसपी से रामरती बिंद, 2007 में बीएसपी से नरेंद्र कुशवाहा, बीएसपी से रमेश दुबे, गोरखनाथ पांडे 2009 में बीएसपी से, 2014 में बीजेपी के वीरेंद्र सिंह मस्त जीते, 2019 में बीजेपी के रमेश चंद बिंद जीते.

जातीय समीकरण
भदोही लोकसभा सीट पर ब्राह्मण और बिंद निर्णायक हैं। इनके अलावा दलित और मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका भी अहम है. जातीय समीकरण की बात करें तो ब्राह्मण 3,25,000, बिंद 2,95,000, दलित 2,65,000, यादव 1,55,000, राजपूत 95,000, मौर्य 1,15,000, पाल 90,000, वैश्य 1,55,000, पटेल 95,000, मुस्लिम 255,000 और अन्य 1 हैं. 50 हजार मतदाता हैं.

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