यूरोपीय संघ के चुनावों में दक्षिणपंथी पार्टियों की बड़ी जीत, फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों को करारी हार

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इमैनुएल मैक्रों

ब्रुसेल्स: यूरोपीय संघ (ईयू) के चुनावों में दक्षिणपंथी पार्टियों ने कई देशों की सत्तारूढ़ सरकारों को भारी नुकसान पहुंचाया है और रविवार को हुए संसदीय चुनावों में बड़ी सफलता हासिल की है। इतना ही नहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को भी चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा है। कुल 27 सदस्य देशों वाले यूरोपीय संघ में सत्ता की चाबी दक्षिणपंथी पार्टियों के हाथ में जाती दिख रही है। यूरोपीय संघ की संसद में इटली के प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी की पार्टी की सीटें दोगुनी हो गई हैं।

घोटाले का असर नहीं दिखा

जर्मनी की धुर दक्षिणपंथी पार्टी ‘अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी’ को भले ही अपने उम्मीदवारों से जुड़े घोटाले का सामना करना पड़ा हो, लेकिन पार्टी ने देश के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ की ‘सोशल डेमोक्रेट्स’ पार्टी को हराने के लिए पर्याप्त सीटें जुटा ली हैं। धुर दक्षिणपंथी पार्टियों से हारने के जोखिम को भांपते हुए यूरोपीय संघ आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की पार्टी ‘क्रिश्चियन डेमोक्रेट्स’ ने चुनावों से पहले ही प्रवास और जलवायु के मुद्दे पर ज़्यादा दक्षिणपंथी रुख़ अपना लिया था, जिसकी वजह से उनकी पार्टी 720 सीटों वाली यूरोपीय संसद में अब तक की सबसे बड़ी पार्टी बनने में सफल रही।

मैक्रों ने चुनावों की घोषणा की

इसमें कोई शक नहीं है कि फ्रांस में रविवार रात हुए संसदीय चुनावों में मरीन ले पेन की ‘नेशनल रैली’ पार्टी का दबदबा रहा, जिसके चलते मैक्रों ने तुरंत नेशनल पार्लियामेंट को भंग कर दिया और मध्यावधि चुनावों की घोषणा कर दी। मैक्रों के लिए यह बड़ा राजनीतिक जोखिम है, क्योंकि उनकी पार्टी को इससे ज़्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए ले पेन ने कहा, “हम देश को बदलने के लिए तैयार हैं, फ्रांस के हितों की रक्षा के लिए तैयार हैं, सामूहिक पलायन की समस्या को खत्म करने के लिए तैयार हैं।” अपनी करारी हार को स्वीकार करते हुए मैक्रों ने कहा, “मैं आपके जनादेश को स्वीकार करता हूं, मैं आपकी चिंताओं से वाकिफ हूं और मैं उन्हें हल किए बिना नहीं जाऊंगा।”

भारत के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव

यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों में सबसे अधिक आबादी वाले देश जर्मनी में ‘अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी’ के कई शीर्ष उम्मीदवार घोटालों में शामिल रहे, लेकिन इसके बावजूद पार्टी का वोट प्रतिशत बढ़ा। पार्टी ने 2019 में 11 प्रतिशत वोट हासिल किए थे, जो बढ़कर 16.5 प्रतिशत हो गए। वहीं जर्मनी के सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल तीनों दलों का संयुक्त वोट प्रतिशत बमुश्किल 30 प्रतिशत से ऊपर रहा। यूरोपीय संघ के 27 देशों में चार दिनों तक चलने वाले इस चुनाव को भारत के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव माना जा रहा है। (एपी)

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