लोकसभा चुनाव परिणाम 2024 समाजवादी पार्टी टिकट वितरण और चुनाव प्रचार यूपी में भाजपा को हराने में मदद करेगा

लोकसभा चुनाव परिणाम: लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस के फिर से उभरने की चर्चा हर कोई कर रहा है। लेकिन इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि समाजवादी पार्टी भी फिर से उभरी है। दरअसल, चुनाव नतीजों के बाद समाजवादी पार्टी देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। यूपी में सपा ने 37 सीटें जीती हैं। पार्टी ने अवध से लेकर पूर्वांचल तक सीटें जीती हैं।

बहरहाल, अब सवाल यह उठता है कि समाजवादी पार्टी ने ऐसा क्या किया जिससे उसे इतनी सीटें मिलीं। वह कौन सी रणनीति थी जिसके जरिए सपा ने यूपी में भाजपा का चुनावी रथ रोक दिया। यूपी में हार की वजह से भाजपा बहुमत से दूर रह गई है। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि सपा ने 2019 में 5 सीटों से 2024 में 37 सीटों तक का सफर कैसे तय किया।

टिकट वितरण रणनीति

लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के चयन में समाजवादी पार्टी ने टिकट बहुत अच्छे से बांटे। सपा ने गैर यादव ओबीसी उम्मीदवारों को खूब टिकट दिए। सिर्फ पांच यादव उम्मीदवारों को टिकट दिए गए, जो अखिलेश यादव परिवार से ही थे। 27 गैर यादव ओबीसी; 11 सवर्ण जिनमें चार ब्राह्मण, दो ठाकुर, दो वैश्य और एक खत्री; 4 मुस्लिम उम्मीदवार और 15 दलित उम्मीदवारों को टिकट दिए गए।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एक सपा नेता ने कहा, “हमारी पार्टी को यादवों और मुसलमानों के समर्थन का भरोसा था, लेकिन हम इन दो समुदायों से आगे अपना आधार बढ़ाना चाहते थे और गैर-यादव ओबीसी और दलितों तक पहुंचना चाहते थे, जो अब हो गया है।”

चुनाव प्रचार की शैली में बदलाव

टिकट वितरण की कला ही एकमात्र रणनीति नहीं है जिसने सपा को जीत दिलाई है, बल्कि जिस तरह से चुनाव प्रचार किया गया, उसने भी कुछ हद तक जीत सुनिश्चित की है। जहां भाजपा ने बड़ी और भव्य रैलियों पर ध्यान केंद्रित किया, वहीं सपा-कांग्रेस ने मिलकर भव्यता के बजाय लोगों और स्थानीय समुदायों तक पहुंचने पर जोर दिया।

इसका एक उदाहरण यह है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने रायबरेली और अमेठी में जमकर प्रचार किया, लेकिन उन्होंने कोई बड़ी रैली नहीं की। इसके बजाय, वह हर दिन 20 नुक्कड़ सभाएं करती नजर आईं, जो सुबह से देर शाम तक चलती रहीं। सपा प्रत्याशी भी बड़ी रैलियों के बजाय लोगों से मिलने-जुलने को ज्यादा महत्व दे रहे थे।

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